Shero shayari-Top 100+ शेरो शायरी in hindi

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सारी दुनिया के रूठ जाने से मुझे कोई गरज नहीं
बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है

तकलीफ ये नही की तुझे अज़ीज़ कोई और है
दर्द तब हुआ जब हम नजरअंदाज किये गये

मील को हर शख्स एहतराम से मिला
पर जो मिला किसी न किसी काम से मिला

मिज़ाज़ में थोड़ी सख्ती लाज़मी है हुज़ूर
लोग पि जाते है समन्दर अगर खड़ा न होता

तुझसे दूर रहकर तुन वक़्त गुज़ारा मैंने
ना होंठ हिले फिर भी पल पल पुकारा मैंने

हर किसी कै किसमत मै ऐसा लिखा नही हौता .
हर मंजिल मै तैरै जैसा दौस्त का पाता नही मिलता
मैरी तकादीर हौगी कुछ खास
वरना तैरै जैसा यार मुझै कहा मिलता

दोस्ती अच्छी हो तो रंग़ लाती है
दोस्ती गहरी हो तो सबको भाती है
दोस्ती नादान हो तो टूट जाती है
पर अगर दोस्ती अपने जैसी हो
तो इतिहास बनाती है

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ
सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ
जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश
मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ

नशा हम करते हैं
इलज़ाम शराब को दिया जाता है
मगर इल्ज़ाम शराब का नहीं उनका है
जिनका चेहरा हमें हर जाम में नज़र आता है

साथ ना रहने से रिश्ते टूटा नहीं करते
वक़्त की धुंध से लम्हे टूटा नहीं करते
लोग कहते हैं कि मेरा सपना टूट गया
टूटी नींद है , सपने टूटा नहीं करते

तुम्हारा नाम आया और हम ताकने लगे रास्ता
तुम्हारी याद आई और खिड़की खोल दी हमने

चेहरा हसीं गुलाबो से मिलता जुलता है
नशा पीने से ज्यादा तुम को देखने से चढ़ता है

मुझमे बे इन्तहा मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
तुम अगर चाहो तो सांसो की तलाशी लेलो

दिल में तुम्हारी अपनी कमी छोड़ जायेंगे
आँखों में इंतज़ार की लकीर छोड़ जायेंगे

अजीब का प्यार था उसकी उदास आँखों में
महसूस तक न हुआ की मुलाक़ात आखरी है

मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पे न जा
इक नजर फेर ले, जीने की इजाजत दे दे
रुठ ने वाले वो पहली सी मोहब्बत दे दे
इश्क मासुम है, इल्जाम लगाने पे न जा

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं
अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं
अकेले हम कागज हैं, मिल जाए तो किताब हैं

प्यार कहो तो दो ढाई लफज़, मानो तो बन्दगी
सोचो तो गहरा सागर,डूबो तो ज़िन्दगी
करो तो आसान ,निभाओ तो मुश्किल
बिखरे तो सारा जहाँ ,और सिमटे तो ” तुम

कुछ रिश्तों को कभी भी… नाम ना देना तुम
इन्हें चलने दो ऐसे ही… इल्ज़ाम ना देना तुम
ऐसे ही रहने दो तुम… तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में
के अल्फ़ाज़ों को मेरे… अंज़ाम ना देना तुम

मुझसे नफरत करके भी खुश ना रह पाओगे
मुझसे दूर जाकर भी पास ही पाओगे
प्यार में दिमाग पर नहीं दिल पर ऐतबार करके देखिये
अपने आप को रोम – रोम में बसा पाएँगे

दुनिया की भीड़ में तुझे याद कर सकूँ कुछ पल
अजनबी राहों की तरफ कदम मोड़ता हूँ

नशा था उनके प्यार का , जिसमें हम खो गए
उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए

खामोशियाँ – बहुत कुछ कहती हैं
कान नही दिल लगा कर सुनना पड़ता है

मैंने उसे बोला ये आसमान कितना बड़ा है ना
पगली ने गले लगाया और कहा इससे बड़ा तो नहीं

रूकता भी नहीं ठीक से चलता भी नही
यह दिल है के तेरे बाद सँभलता ही नही

पता नही कब जाएगी तेरी लापरवाही की आदत
पगली कुछ तो सम्भाल कर रखती, मुझे भी खो दिया

मोहब्बत का कोई रंग नही फिर भी वो रंगीन है
प्यार का कोई चेहरा नही फिर भी वो हसीन हैं

चलते रहेगें शायरी के दौर मेरे बिना भी
एक शायर के कम हो जाने से शायरी खत्म नहीं हो जाती

मोहब्बत रोग है दिल का इसे दिल पे ही छोड़ दे
दिमाग को अगर बचा लो तो भी गनीमत हो

ना प्यार काम हुआ हा न ही प्यार का अहेसास
बस उसके बिना ज़िन्दगी काटने की आदत हो गई

सीख जाओ वक़्त पर किसी की चाहत की कदर करना
कही कोई थक ना जाए तुम्हे अहसास दिलाते दिलाते

इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ
कही ऐसा ना हो जाए कही वैसा ना हो जाए

शायरी नही आती मुझे बस हेल दिल सुना रही हूँ
बेवफाई का इलज़ाम है मुझपर फिर भी गुनगुना रही हूँ
क़त्ल करने वालो ने कातिल भी हमे ही बना दिया
खफा नही उससे फिर भी मै बस उसका दामन बचा रही हूँ

न जाने किस रूप मे आता हैं
हाथ पकड़ कर पार लगा देता है
मैं उसके सामने सिर झुकाता हूँ,
वो सबके के सामने मेरा सिर उठाता हैं

कभी मतलब के लिए तो कभी बस दिल्लगी के लिए
हर कोई मोहाब्बत ढूँढ़ रहा है यहाँ अपनी तन्हा सी ज़िन्दगी के लिए

काम उनके जो बस काम किया करते हैं
अपने सपनों को अंजाम दिया करते हैं
पता नहीं फिर कुछ लोग रंग क्यों बदलते हैं
मुश्किल उनसे जो बदनाम किया करते हैं

दीवाने है तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं
कैसे कहें कि तुमसे प्‍यार नहीं
कुछ तो कसूर है आपकी आखों का
हम अकेले तो गुनहगार नहीं

मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो
मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो
दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात
मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो

आँसुओं और शराबों में गुजारी है हयात
मैं ने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं
जाने क्या टूटा है पैमाना कि दिल है मेरा
बिखरे-बिखरे हैं खयालात मुझे होश नहीं

चले गए है दूर कुछ पल के लिए
मगर करीब है हर पल के लिए
किसे भुलायेंगे आपको एक पल के लिए
जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए

चले गए है दूर कुछ पल के लिए
मगर करीब है हर पल के लिए
किसे भुलायेंगे आपको एक पल केलिए
जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए

चले गए है दूर कुछ पल के लिए
मगर करीब है हर पल के लिए
किसे भुलायेंगे आपको एक पल केलिए
जब हो चूका है प्यार उम्र भर के लिए

आये हो आँखों में तो कुछ देर तो ठहर जाओ
एक उम्र लग जाती है एक ख्वाब सजाने में

कितने मासूम होते है ये आँखों के आँसू भी
ये निकलते भी उन के लिए है जिन्हे इनकी परवाह तक नहीं होती

खींच कर आज मुझे मेरे घर लायी है
मेरे बचपन की यादे मेरे मन में समायी है
अब ना चाहिए मुझे दौलत इस दुनिया की
मेरी माँ की मोहब्बत मेरी उम्र भर की कमाई है

जिसकी चाहत मे हमने सारी दुनियॉ भुला दी
उस शखस ने दो पल मे ही हमारी हसती मिटा दी.
मिटा तो हम भी सकते थे पहचान उसकी दिल से
पर उसकी मासूमियत को देखकर हमने
अपनी ये आरजू भी भुला दी.

“पुछ कर देख अपने दिल से की हमे भुलना चहाता है क्या…
अगर उसने हा कहा तो कसम से महोब्बत करना छोङ देगे…!”

“रोज रोज गिरकर भी मुकम्मल खड़ा हूँ…
ऐ मुश्किलों! देखो मैं तुमसे कितना बड़ा हूँ…!”

“आज कुछ और नहीं बस इतना सुनो
मौसम हसीन है लेकिन तुम जैसा नहीं…!”

“तुम्हारी खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे मगर…
हमारी बेचैनियों की वजह… बस तुम हो…!”

“नींद से उठ कर इधर-उधर ढूँढती रहती हूँ मै…
कि ख्वाबो में मेरे इतने करीब चले आते हो तुम…!”

“तन्हाइयों का एक अलग ही सुरुर होता है…
इसमें डर नहीं होता.किसी से बिछड जाने का…!”

“ये दरिया-ए-इश्क है कदम जरा सोच के रखना..
इस में उतर कर किसी को किनारा नहीं मिला…!”

“शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना…
गमों की महफिल भी कमाल की जमती है…!”

“ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहल…
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है…!”

“अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें…
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें…!”

“देखकर दर्द किसी का जो आह निकल जाती है…
बस इतनी से बात आदमी को इंसान बनाती है…!”

“भरे बाजार से अक्सर ख़ाली हाथ ही लौट आता हूँ…
पहले पैसे नहीं थे अब ख्वाहिशें नहीं रहीं…!”

“पंछी ने जब जब किया पंखों पर विश्वास…
दूर दूर तक हो गया उसका ही आकाश…!”

“मुझे अपनी वफादारी पे कोई शक नही होता…
मैं खून-ए-दिल मिला देता हु जब झंडा बनाता हु…!”

“हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी…
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है…!”

“कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से…
ये नए मिजाज का शहर है, जरा फ़ासले से मिला करो…!”

“नाराज़ होकर जिंदगी से नाता नही तोड़ते,
मुश्किल हो राह फ़िर भी मंजिल नही छोड़ते…
तनहा ना समझना खुद को कभी,
हम उनमे से नही है, जो कभी साथ नही छोड़ते..!”

“दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे..
जब कभी हम दोस्त हो जायें तो शर्मिंदा न हों…!”

“नजर चाहती है दीदार करना
दिल चाहता है प्यार करना…
क्या बताऊँ इस दिल का आलम
नसीब में लिखा है इंतज़ार करना…!”

“तेरे खामोश होठों पर मोहब्बत गुन गुनाती है…
तू मेरी है मैं तेरा हूँ बस यही आवाज़ आती है…!”

“तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है….
तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है…!”

“तुम्हारी खुशियों के ठिकाने बहुत होंगे मगर…
हमारी बेचैनियों की वजह… बस तुम हो…!”

“कोई हाथ भी न मिलाएगा,
जो गले मिलोगे तपाक से…
ये नए मिजाज का शहर है,
जरा फ़ासले से मिला करो.. !”

“दिल के सागर में लहरे उठाया न करो
ख्वाब बन कर चुराया न करो…
बहुत चोट लगी है मेरे दिल को
तुम ख़्वाबों में आकर यूँ तडपाया न करो…!”

“हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है…
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा…!”

“तुमसे क्या गिला करना गुजारिश है मिला करना…
जिंदगी मेरी आसान होगी बस साँसों में घुला करना…!”

“कितने दूर निकल गए रिश्ते निभाते निभाते
खुद को खो दिया हमने अपनों को पाते पाते…
लोग कहते हैं दर्द है मेरे दिल में
और हम थक गए मुस्कुराते मुस्कुराते…!”

“एक दिन तुझ से मिलने जरूर आऊंगा…
जिंदगी मुझ को तेरा पता चाहिए…!”

“धन से बेशक गरीब रहो पर दिल से रहना धनवान…
अक्सर झोपडी पे लिखा होता है सुस्वागतम…
और महल वाले लिखते है कुत्ते से सावधान…!”

“लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में..
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में..!”

“उडने दो परींदो को अभी शोख हवा में…
फिर लौट के बचपन के जमाने नहीं आते…!”

“तेरे ग़म में तड़प कर मर जायेंगे
मर गए तो तेरा नाम ले जायेंगे…
रिश्वत देकर तुझे भी बुलायेंगे
तुम ऊपर आओगे तो साथ बैठकर कुरकुरे खायें…!”

“पलकें भी चमक जाती हैं सोते में हमारी…
आंखों को अभी ख्वाब छुपाने नहीं आते…!”

“अजीब शख्स है नारा होके हंसता है…
मैं चाहता हूं ख़फ़ा हो, तो ख़फ़ा ही लगे…!”

“रात तो अपने समय पर ही होती है..
इक तेरा ख्याल है जो कभी भी आ जाता है…!”

“किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ…
बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ…!”

“देने वाले ने दिया सब कुछ अजब अंदाज से..
सामने दुनिया पड़ी है और उठा सकते नहीं…!”

“वो मंदिर भी जाता है और मस्जिद भी…
परेशान पति का, कोई मज़हब नहीं होता…!”

“न रख इतना गुरूर अपने नशे में ए शराब…
तुझसे ज्यादा नशा रखती हैं आँखे किसी की…!”

“कभी धूप दे, कभी बदलियां,
दिलोजान से दोनों कुबूल हैं…
मगर उस नगर में ना कैद कर,
जहां जिन्दगी की हवा ना हो…!”

“दीवाने है तेरे नाम के इस बात से इंकार नहीं
कैसे कहें कि तुमसे प्‍यार नहीं…
कुछ तो कसूर है आपकी आखों का
हम अकेले तो गुनहगार नहीं…!”

“मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी…
वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा…!”

“मोहब्बत का सफर लंबा हुआ​;​
​​तो क्या हुआ, थोड़ा तुम चलो​…
​थोड़ा हम चले, थोड़ा तुम चलो;​
​थोड़ा हम चले, फिर रिक्शा कर लेंगे…!”

“देखकर दर्द किसी का जो आह निकल जाती है…
बस इतनी से बात आदमी को इंसान बनाती है…!”

“पानी में विस्की मिलाओ तो नशा चढ़ता है;
पानी में रम मिलाओ तो नशा चढ़ता है…
पानी में ब्रेंड़ी मिलाओ तो नशा चढ़ता है;
साला पानी में ही कुछ गड़बड़ है…!”

“मेरी मोहब्बत की हद मत तय करना तुम…
तुम्हें सांसों से भी ज्यादा मोहब्बत करते हैं हम…!”

“एक शराबी की दास्तां…
सोच रहा हूँ दारू छोड़ दूं;
पर, किसके सहारे छोडू?
सभी कमीने है साले, पी जायंगे…!”

“मुस्कुराने की आदत भी कितनी महंगी पड़ी हमें…
छोड़ गया वो ये सोच कर कि हम जुदाई में भी खुश हैं…!”

“हमेशा ज़िन्दगी में मुस्कुराते रहो;
हर इंसान को अपना बनाते रहो…
जब तक कोई कार वाली ना बने तुम्हारी गर्लफ्रेंड;
तब तक स्कूटर वाली से ही काम चलाते रहो…!”

“कैसे लिखोगे मोहब्बत की किताब…
तुम तो करने लगे पल-पल का हिसाब…!”

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